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يونسआयत 103

तफ़सीर अल-मुख़्तसर

ثُمَّ نُنَجِّى رُسُلَنَا وَٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ ۚ كَذَٰلِكَ حَقًّا عَلَيْنَا نُنجِ ٱلْمُؤْمِنِينَ ﴿١٠٣﴾

फिर हम उनपर दंड उतार देते हैं और अपने रसूलों को बचा लेते हैं, तथा उनके साथ ईमान लाने वालों को भी बचा लेते हैं। इसलिए वे उस यातना से पीड़ित नहीं होते, जिससे उनकी क़ौम ग्रस्त होती है। जिस प्रकार हमने उन रसूलों और उनके साथ मोमिनों को बचा लिया, ऐसे ही हम अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को और आपके साथ मोमिनों को बचा लेंगे। यह बचाना हमपर एक सिद्ध अधिकार है।