तफ़सीर अल-मुख़्तसर
إِنَّمَا مَثَلُ ٱلْحَيَوٰةِ ٱلدُّنْيَا كَمَآءٍ أَنزَلْنَـٰهُ مِنَ ٱلسَّمَآءِ فَٱخْتَلَطَ بِهِۦ نَبَاتُ ٱلْأَرْضِ مِمَّا يَأْكُلُ ٱلنَّاسُ وَٱلْأَنْعَـٰمُ حَتَّىٰٓ إِذَآ أَخَذَتِ ٱلْأَرْضُ زُخْرُفَهَا وَٱزَّيَّنَتْ وَظَنَّ أَهْلُهَآ أَنَّهُمْ قَـٰدِرُونَ عَلَيْهَآ أَتَىٰهَآ أَمْرُنَا لَيْلًا أَوْ نَهَارًا فَجَعَلْنَـٰهَا حَصِيدًا كَأَن لَّمْ تَغْنَ بِٱلْأَمْسِ ۚ كَذَٰلِكَ نُفَصِّلُ ٱلْـَٔايَـٰتِ لِقَوْمٍ يَتَفَكَّرُونَ ﴿٢٤﴾
सांसारिक जीवन का उदाहरण, जिसके आनंद में तुम लीन हो, जल्दी समाप्त होने के मामले में, बारिश के पानी की तरह है, जिससे धरती से उगने वाले पौधे, जिन्हें इनसान भी खाते हैं, जैसे अनाज और फल आदि और पशु भी खाते हैं, जैसे घास आदि, खूब घने होकर निकल आए। यहाँ तक कि जब धरती ने सुंदरता की चादर ओढ़ ली और वह विभिन्न प्रकार के पौधों से सज गई तथा उसके मालिकों ने समझ लिया कि वे धरती की उगाई हुई फसलों को काटने और फलों को तोड़ने में सक्षम हैं, कि अचानक उसे नष्ट करने का हमारा निर्णय आ गया और हमने उसे कटी हुई फ़सल की तरह कर दिया, मानो वह खेत कुछ समय पहले तक पेड़-पौधों से भरा हुआ था ही नहीं। जिस प्रकार हमने तुम्हारे लिए दुनिया की स्थिति और उसके जल्दी ख़त्म होने को खोल-खोलकर बयान किया है, उसी प्रकार हम सोचने और विचार करने वालों के लिए प्रमाणों एवं तर्कों का वर्णन करते हैं।