तफ़सीर अल-मुख़्तसर
قُلْ هَلْ مِن شُرَكَآئِكُم مَّن يَهْدِىٓ إِلَى ٱلْحَقِّ ۚ قُلِ ٱللَّهُ يَهْدِى لِلْحَقِّ ۗ أَفَمَن يَهْدِىٓ إِلَى ٱلْحَقِّ أَحَقُّ أَن يُتَّبَعَ أَمَّن لَّا يَهِدِّىٓ إِلَّآ أَن يُهْدَىٰ ۖ فَمَا لَكُمْ كَيْفَ تَحْكُمُونَ ﴿٣٥﴾
(ऐ रसूल!) आप उनसे कह दें : क्या तुम्हारे ठहराए हुए उन साझीदारों में, जिनकी तुम अल्लाह के अलावा पूजा करते हो, कोई ऐसा है, जो सत्य की ओर मार्गदर्शन करेॽ आप उनसे कह दें : केवल अल्लाह ही सत्य की ओर मार्गदर्शन करता है। तो क्या जो लोगों को सीधा रास्ता दिखाए और उसकी ओर लोगों को बुलाए, वह इसका अधिक योग्य है कि उसका अनुसरण किया जाए या कि तुम्हारे वे पूज्य जो स्वयं ही मार्ग नहीं पाते, जबतक कि कोई दूसरा उन्हें मार्ग न दिखा देॽ! फिर तुम्हें क्या हो गया है, तुम कैसे व्यर्थ फ़ैसले करते हो, जब यह दावा करते हो कि वे अल्लाह के साझीदार हैंॽ! अल्लाह तुम्हारे कथन से बहुत ऊँचा है।