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الكافرونआयत 2

तफ़सीर अल-मुख़्तसर

لَآ أَعْبُدُ مَا تَعْبُدُونَ ﴿٢﴾

मैं उन मूर्तियों की न वर्तमान में इबादत करता हूँ और न भविष्य में इबादत करूँगा, जिन्हें तुम पूजते हो।