तफ़सीर अल-मुख़्तसर
وَمَا ظَلَمْنَـٰهُمْ وَلَـٰكِن ظَلَمُوٓا۟ أَنفُسَهُمْ ۖ فَمَآ أَغْنَتْ عَنْهُمْ ءَالِهَتُهُمُ ٱلَّتِى يَدْعُونَ مِن دُونِ ٱللَّهِ مِن شَىْءٍ لَّمَّا جَآءَ أَمْرُ رَبِّكَ ۖ وَمَا زَادُوهُمْ غَيْرَ تَتْبِيبٍ ﴿١٠١﴾
और हमने उन्हें विनष्ट करके उनपर कोई अत्याचार नहीं किया, बल्कि उन्होंने अल्लाह के साथ कुफ़्र करके अपने आपको विनाश का हक़दार बनाकर स्वयं अपने ऊपर अत्याचार किया। ऐ रसूल! जब उन्हें विनष्ट करने का आपके पालनहार का आदेश आ गया, तो वे जिन पूज्यों की पूजा किया करते थे, वे उनसे उनपर आने वाले अज़ाब को न टाल सके तथा नुक़सान एवं विनाश में वृद्धि के सिवा उनके किसी काम न आए।