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هودआयत 116

तफ़सीर अल-मुख़्तसर

فَلَوْلَا كَانَ مِنَ ٱلْقُرُونِ مِن قَبْلِكُمْ أُو۟لُوا۟ بَقِيَّةٍ يَنْهَوْنَ عَنِ ٱلْفَسَادِ فِى ٱلْأَرْضِ إِلَّا قَلِيلًا مِّمَّنْ أَنجَيْنَا مِنْهُمْ ۗ وَٱتَّبَعَ ٱلَّذِينَ ظَلَمُوا۟ مَآ أُتْرِفُوا۟ فِيهِ وَكَانُوا۟ مُجْرِمِينَ ﴿١١٦﴾

ऐसा क्यों न हुआ कि पहले के यातना ग्रस्त समुदायों में कुछ सदाचारी होते, जो उन समुदायों को कुफ्र से तथा गुनाहों के द्वारा धरती पर उपद्रव करने से रोकते। उनके अंदर ऐसे लोग नहीं रह गए थे, सिवाय उनमें से कुछ के जो भ्रष्टाचार से मना कर रहे थे। अतः उनकी अत्याचारी जाति को विनष्ट करते समय हमने उनको बचा लिया। जबकि उन जातियों के अत्याचारी लोग सुख और आनंद के पीछे लगे रहे। और ऐसा करके वे अन्याय कर रहे थे।