तफ़सीर अल-मुख़्तसर
وَإِلَىٰ مَدْيَنَ أَخَاهُمْ شُعَيْبًا ۚ قَالَ يَـٰقَوْمِ ٱعْبُدُوا۟ ٱللَّهَ مَا لَكُم مِّنْ إِلَـٰهٍ غَيْرُهُۥ ۖ وَلَا تَنقُصُوا۟ ٱلْمِكْيَالَ وَٱلْمِيزَانَ ۚ إِنِّىٓ أَرَىٰكُم بِخَيْرٍ وَإِنِّىٓ أَخَافُ عَلَيْكُمْ عَذَابَ يَوْمٍ مُّحِيطٍ ﴿٨٤﴾
और हमने मदयन की ओर उनके भाई शुऐब को भेजा। उन्होंने कहा : ऐ मेरी जाति के लोगो! अकेले अल्लाह की इबादत करो। उसके अलावा तुम्हारा कोई पूज्य नहीं जो इबादत का हक़दार हो। तथा जब लोगों को नाप या तौलकर कुछ दो, तो उसमें कमी न करो। मैं तुम्हें विस्तृत आजीविका और नेमत में देख रहा हूँ। इसलिए पाप करके अपने ऊपर अल्लाह की नेमत को मत बदलो। मैं तुमपर उस घेरने वाले दिन की यातना से डरता हूँ, जो तुम में से हर एक को पकड़ लेगी, तुम्हें उससे भागने या शरण लेने का स्थान नहीं मिलेगा।