तफ़सीर अल-मुख़्तसर
ثُمَّ بَدَا لَهُم مِّنۢ بَعْدِ مَا رَأَوُا۟ ٱلْـَٔايَـٰتِ لَيَسْجُنُنَّهُۥ حَتَّىٰ حِينٍ ﴿٣٥﴾
फिर जब अज़ीज़ और उसके समुदाय के लोगों ने उनकी बेगुनाही का सबूत देखा, तो उनकी यह राय बनी कि उन्हें एक अज्ञात अवधि के लिए जेल में डाल दें। (ताकि वह मामला खुल न जाए)।