तफ़सीर अल-मुख़्तसर
ٱذْهَبُوا۟ بِقَمِيصِى هَـٰذَا فَأَلْقُوهُ عَلَىٰ وَجْهِ أَبِى يَأْتِ بَصِيرًا وَأْتُونِى بِأَهْلِكُمْ أَجْمَعِينَ ﴿٩٣﴾
चुनाँचे जब यूसुफ़ के भाइयों ने उन्हें बताया कि उनके पिता की आँखों की रोशनी चली गई है, तो उन्हें अपना कुर्ता दे दिया और कहा : मेरे इस कुर्ते को ले जाओ और इसे मेरे पिता के चेहरे पर डाल दो, उनकी आँखों की रोशनी लौट आएगी। फिर अपने तमाम घर वालों को मेरे पास ले आओ।