तफ़सीर अल-मुख़्तसर
وَٱلَّذِينَ صَبَرُوا۟ ٱبْتِغَآءَ وَجْهِ رَبِّهِمْ وَأَقَامُوا۟ ٱلصَّلَوٰةَ وَأَنفَقُوا۟ مِمَّا رَزَقْنَـٰهُمْ سِرًّا وَعَلَانِيَةً وَيَدْرَءُونَ بِٱلْحَسَنَةِ ٱلسَّيِّئَةَ أُو۟لَـٰٓئِكَ لَهُمْ عُقْبَى ٱلدَّارِ ﴿٢٢﴾
और वे ऐसे लोग हैं, जिन्होंने अल्लाह की प्रसन्नता के लिए अल्लाह के आज्ञापालन पर तथा अल्लाह ने जो कुछ अच्छा या बुरा उनपर नियत किया है, उसपर सब्र किया और अल्लाह की अवज्ञा से रुक गए, और संपूर्ण रूप से नमाज़ अदा किया, तथा हमारे दिए हुए धन से अनिवार्य हुक़ूक़ (अधिकार) का भुगतान किया, और उसमें से कभी दिखावे से बचने के लिए चुपके से स्वेच्छिक दान दिया और कभी खुले तौर पर दान किया ताकि दूसरे लोग उनका अनुकरण करें, तथा उनके साथ जो दुर्व्यवहार करे उसकी बुराई को उसके साथ अच्छा व्यवहार करके दूर करते हैं। इन विशेषताओं से विशेषित लोगों के लिए क़ियामत के दिन अच्छा परिणाम है।