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الحجرआयत 85

तफ़सीर अल-मुख़्तसर

وَمَا خَلَقْنَا ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضَ وَمَا بَيْنَهُمَآ إِلَّا بِٱلْحَقِّ ۗ وَإِنَّ ٱلسَّاعَةَ لَـَٔاتِيَةٌ ۖ فَٱصْفَحِ ٱلصَّفْحَ ٱلْجَمِيلَ ﴿٨٥﴾

हमने आसमानों और ज़मीन और उनके बीच की समस्त चीज़ों को बिना हिकमत के व्यर्थ (निरुद्देश्य) पैदा नहीं किया है। हमने यह सब सत्य के साथ पैदा किया है और निःसंदेह क़ियामत अवश्य आने वाली है। अतः (ऐ रसूल!) आप झुठलाने वालों को नज़रअंदाज़ कर दें और उन्हें भले तौर पर क्षमा कर दें।