तफ़सीर अल-मुख़्तसर
فَكُلُوا۟ مِمَّا رَزَقَكُمُ ٱللَّهُ حَلَـٰلًا طَيِّبًا وَٱشْكُرُوا۟ نِعْمَتَ ٱللَّهِ إِن كُنتُمْ إِيَّاهُ تَعْبُدُونَ ﴿١١٤﴾
इसलिए, (ऐ बंदो!) अल्लाह की दी हुई वह वस्तुएँ जो खाने में अच्छी लगें और हलाल हों, खाओ, और अल्लाह की दी हुई नेमतों का, उन्हें अल्लाह की दी हुई नेमत मानकर और उसकी प्रसन्नता के कामों में लगाकर, शुक्रिया अदा करो, यदि तुम अकेले उसी की इबादत करते हो और उसके साथ किसी को साझी नहीं बनाते हो।