तफ़सीर अल-मुख़्तसर
وَلَقَدْ بَعَثْنَا فِى كُلِّ أُمَّةٍ رَّسُولًا أَنِ ٱعْبُدُوا۟ ٱللَّهَ وَٱجْتَنِبُوا۟ ٱلطَّـٰغُوتَ ۖ فَمِنْهُم مَّنْ هَدَى ٱللَّهُ وَمِنْهُم مَّنْ حَقَّتْ عَلَيْهِ ٱلضَّلَـٰلَةُ ۚ فَسِيرُوا۟ فِى ٱلْأَرْضِ فَٱنظُرُوا۟ كَيْفَ كَانَ عَـٰقِبَةُ ٱلْمُكَذِّبِينَ ﴿٣٦﴾
हमने पिछले हर समुदाय में एक रसूल भेजा, जो अपने समुदाय के लोगों को आदेश देता कि वे एक अल्लाह की इबादत करें और उसके अलावा मूर्तियों, शैतानों और अन्य चीज़ों की इबादत छोड़ दें। चुनाँचे उनमें से कुछ को अल्लाह ने सामर्थ्य प्रदान किया और वे अल्लाह पर ईमान लाए और उसके रसूल की लाई हुई बातों का पालन किए। तथा उनमें से कुछ ऐसे थे जिन्होंने अल्लाह का इनकार किया और उसके रसूल की अवज्ञा की, तो अल्लाह ने उन्हें सामर्थ्य नहीं दिया। अतः उनपर गुमराही सिद्ध हो गई। इसलिए धरती में चलो-फिरो, ताकि अपनी आँखों से देखो कि झुठलाने वालों पर यातना और विनाश आने के बाद उनका अंजाम कैसा हुआ?