तफ़सीर अल-मुख़्तसर
فَلَا تَضْرِبُوا۟ لِلَّهِ ٱلْأَمْثَالَ ۚ إِنَّ ٱللَّهَ يَعْلَمُ وَأَنتُمْ لَا تَعْلَمُونَ ﴿٧٤﴾
अतः (ऐ लोगो!) इन मूर्तियों में से जो लाभ या हानि के मालिक नहीं हैं किसी को अल्लाह के समान न ठहराओ। क्योंकि अल्लाह के समान कोई नहीं है कि उसे तुम इबादत में उसका साझी मानो। अल्लाह अपनी महिमा और पूर्णता के गुणों को जानता है और तुम उसे नहीं जानते। यही कारण है कि तुम बहुदेववाद में पड़ जाते हो और दावा करते हो कि वह तुम्हारी मूर्तियों के समान है।