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النحلआयत 80

तफ़सीर अल-मुख़्तसर

وَٱللَّهُ جَعَلَ لَكُم مِّنۢ بُيُوتِكُمْ سَكَنًا وَجَعَلَ لَكُم مِّن جُلُودِ ٱلْأَنْعَـٰمِ بُيُوتًا تَسْتَخِفُّونَهَا يَوْمَ ظَعْنِكُمْ وَيَوْمَ إِقَامَتِكُمْ ۙ وَمِنْ أَصْوَافِهَا وَأَوْبَارِهَا وَأَشْعَارِهَآ أَثَـٰثًا وَمَتَـٰعًا إِلَىٰ حِينٍ ﴿٨٠﴾

अल्लाह ने तुम्हारे पत्थर एवं अन्य चीज़ों के बनाए हुए घरों को तुम्हारे लिए स्थिरता और विश्राम का स्थान बनाया। तथा ऊँट, गाय और बकरी की खालों से तुम्हारे लिए शहरी घरों की तरह रेगिस्तान (दीहात) में तंबू और गुंबद बनाए, जिन्हें तुम्हारे लिए अपने सफ़र के दौरान एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाना आसान होता है, और तुम्हारे पड़ाव डालने के समय उन्हें आसानी से लगाया जा सकता है। तथा भेड़ के ऊन, ऊँट के रोएँ और बकरी के बालों से तुम्हारे घरों के सामान, कपड़े और ग़िलाफ़ बनाए, जिनसे तुम एक निर्धारित समय तक लाभ उठाते हो।