तफ़सीर अल-मुख़्तसर
وَلَا تَتَّخِذُوٓا۟ أَيْمَـٰنَكُمْ دَخَلًۢا بَيْنَكُمْ فَتَزِلَّ قَدَمٌۢ بَعْدَ ثُبُوتِهَا وَتَذُوقُوا۟ ٱلسُّوٓءَ بِمَا صَدَدتُّمْ عَن سَبِيلِ ٱللَّهِ ۖ وَلَكُمْ عَذَابٌ عَظِيمٌ ﴿٩٤﴾
और तुम अपनी क़समों को धोखे का साधन न बनाओ कि अपने मन की इच्छाओं का पालन करते हुए, एक-दूसरे को धोखा दो। चुनाँचे जब चाहो क़समें तोड़ दो और जब चाहो पूरा करो। क्योंकि अगर तुम ऐसा करोगे, तो तुम्हारे पैर सीधे मार्ग से, उसपर जमन के उपरांत भी, हट जाएंँगे और तुम स्वयं अल्लाह के रास्ते से भटकने और दूसरों को उससे भटकाने के कारण यातना चखोगे और तुम्हारे लिए कई गुना यातना होगी।