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الإسراءआयत 54

तफ़सीर अल-मुख़्तसर

رَّبُّكُمْ أَعْلَمُ بِكُمْ ۖ إِن يَشَأْ يَرْحَمْكُمْ أَوْ إِن يَشَأْ يُعَذِّبْكُمْ ۚ وَمَآ أَرْسَلْنَـٰكَ عَلَيْهِمْ وَكِيلًا ﴿٥٤﴾

(ऐ लोगो!) तुम्हारा पालनहार तुम्हें सबसे अधिक जानता है। अतः उससे तुम्हारी कोई चीज़ छिपी नहीं है। यदि वह तुमपर दया करना चाहे, तो दया करे इस प्रकार कि तुम्हें ईमान और अच्छे कार्य की तौफीक़ प्रदान कर दे। और यदि वह तुम्हें सज़ा देना चाहे, तो सज़ा दे इस प्रकार कि तुम्हे ईमान से वंचित कर दे और तुम्हें कुफ्र की अवस्था में मृत्यु दे। और (ऐ रसूल!) हमने आपको उनपर संरक्षक (ज़िम्मेदार) बनाकर नहीं भेजा है कि आप उन्हें ईमान लाने पर मजबूर करें और कुफ्र से रोकें और उनके कार्यों को गिन-गिनकर रखें। आपका काम तो केवल अल्लाह की ओर से उस संदेश को पहुँचा देना है, जिसे पहुँचाने का आपको आदेश दिया गया है।