तफ़सीर अल-मुख़्तसर
يَوْمَ نَدْعُوا۟ كُلَّ أُنَاسٍۭ بِإِمَـٰمِهِمْ ۖ فَمَنْ أُوتِىَ كِتَـٰبَهُۥ بِيَمِينِهِۦ فَأُو۟لَـٰٓئِكَ يَقْرَءُونَ كِتَـٰبَهُمْ وَلَا يُظْلَمُونَ فَتِيلًا ﴿٧١﴾
(ऐ रसूल) याद कीजिए, जिस दिन हम प्रत्येक समूह को उसके उस इमाम के साथ बुलाएँगे, जिसके पीछे वे दुनिया में चलते थे। फिर जिसे उसका कर्मपत्र उसके दाहिने हाथ में दिया गया, तो ऐसे लोग अपना कर्मपत्र ख़ुशी से पढ़ेंगे और उनके बदले में कुछ भी कमी नहीं की जाएगी, चाहे वह खजूर की गुठली के बीच पाए जाने वाले धागे जितना छोटा क्यों न हो।