तफ़सीर अल-मुख़्तसर
قُلْ إِنَّمَآ أَنَا۠ بَشَرٌ مِّثْلُكُمْ يُوحَىٰٓ إِلَىَّ أَنَّمَآ إِلَـٰهُكُمْ إِلَـٰهٌ وَٰحِدٌ ۖ فَمَن كَانَ يَرْجُوا۟ لِقَآءَ رَبِّهِۦ فَلْيَعْمَلْ عَمَلًا صَـٰلِحًا وَلَا يُشْرِكْ بِعِبَادَةِ رَبِّهِۦٓ أَحَدًۢا ﴿١١٠﴾
(ऐ रसूल!) आप कह दीजिए : मैं तो तुम्हारे ही जैसा एक मनुष्य हूँ। मेरी ओर वह़्य (प्रकाशना) की जाती है कि तुम्हारा वास्तविक पूज्य बस एक ही है, उसका कोई साझी नहीं और वह अल्लाह है। अतः जो अपने रब से मिलने का भय रखता हो, वह अपने पालनहार के प्रति निष्ठावान होकर उसकी शरीयत के अनुसार कार्य करे और अपने पालनहार की उपासना में किसी को साझी न बनाए।