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مريمआयत 23

तफ़सीर अल-मुख़्तसर

فَأَجَآءَهَا ٱلْمَخَاضُ إِلَىٰ جِذْعِ ٱلنَّخْلَةِ قَالَتْ يَـٰلَيْتَنِى مِتُّ قَبْلَ هَـٰذَا وَكُنتُ نَسْيًا مَّنسِيًّا ﴿٢٣﴾

फिर प्रसव पीड़ा बढ़ी, जो उसे खजूर के एक तने के पास ले आई। तब मरयम अलैहस्सलाम कहने लगी : ऐ काश! मैं इस दिन से पहले ही मर गई होती, और मैं एक भूली-बिसरी चीज़ होती, ताकि मेरे बारे में कोई बुराई नहीं सोची जाती।