तफ़सीर अल-मुख़्तसर
سَيَقُولُ ٱلسُّفَهَآءُ مِنَ ٱلنَّاسِ مَا وَلَّىٰهُمْ عَن قِبْلَتِهِمُ ٱلَّتِى كَانُوا۟ عَلَيْهَا ۚ قُل لِّلَّهِ ٱلْمَشْرِقُ وَٱلْمَغْرِبُ ۚ يَهْدِى مَن يَشَآءُ إِلَىٰ صِرَٰطٍ مُّسْتَقِيمٍ ﴿١٤٢﴾
शीघ्र ही अज्ञानी, अल्पबुद्धि यहूदी और उनके जैसे मुनाफ़िक़ (पाखंडी) कहेंगे : मुसलमानों को बैतुल-मक़दिस के क़िबला से, जो पहले उनका क़िबला था, किस चीज़ ने फेर दिया?! (ऐ नबी!) आप उन्हें उत्तर देते हुए कह दीजिए : पूर्व और पश्चिम तथा अन्य दिशाओं का मालिक अकेला अल्लाह ही है, वह अपने बंदों में से जिसे चाहता है, जिस दिशा की ओर भी चाहता है, निर्देशित कर देता है। तथा वह अपने बंदों में से जिसे चाहता है, सीधे रास्ते का मार्गदर्शन प्रदान करता है, जिसमें कोई टेढ़ापन और विचलन नहीं है।