तफ़सीर अल-मुख़्तसर
فَوَيْلٌ لِّلَّذِينَ يَكْتُبُونَ ٱلْكِتَـٰبَ بِأَيْدِيهِمْ ثُمَّ يَقُولُونَ هَـٰذَا مِنْ عِندِ ٱللَّهِ لِيَشْتَرُوا۟ بِهِۦ ثَمَنًا قَلِيلًا ۖ فَوَيْلٌ لَّهُم مِّمَّا كَتَبَتْ أَيْدِيهِمْ وَوَيْلٌ لَّهُم مِّمَّا يَكْسِبُونَ ﴿٧٩﴾
अतः विनाश और घोर यातना इन लोगों की प्रतीक्षा कर रही है, जो अपने हाथों से किताब लिखते हैं, फिर - झूठ-मूठ - कहते हैं : यह अल्लाह की ओर से है; ताकि वे सत्य और मार्गदर्शन का पालन करने के बदले इस दुनिया में एक छोटी सी क़ीमत, जैसे कि धन और सरदारी प्राप्त कर सकें। अतः उनके लिए बड़ी तबाही और सख़्त अज़ाब है उसके कारण जो उनके हाथों ने लिखकर अल्लाह के खिलाफ झूठ बोला है, तथा उनके लिए तबाही और सख़्त अज़ाब है उसके कारण जो वे उससे धन और सरदारी कमाते हैं।