तफ़सीर अल-मुख़्तसर
بِئْسَمَا ٱشْتَرَوْا۟ بِهِۦٓ أَنفُسَهُمْ أَن يَكْفُرُوا۟ بِمَآ أَنزَلَ ٱللَّهُ بَغْيًا أَن يُنَزِّلَ ٱللَّهُ مِن فَضْلِهِۦ عَلَىٰ مَن يَشَآءُ مِنْ عِبَادِهِۦ ۖ فَبَآءُو بِغَضَبٍ عَلَىٰ غَضَبٍ ۚ وَلِلْكَـٰفِرِينَ عَذَابٌ مُّهِينٌ ﴿٩٠﴾
बहुत बुरी है वह चीज़ जिसे उन्होंने अल्लाह और उसके रसूलों पर ईमान के बदले ले लिया; चुनाँचे उन्होंने अल्लाह की उतारी हुई शरीयत का इनकार कर दिया और उसके रसूलों को झुठलाया, केवल इस कारण अन्याय और ईर्ष्या करते हुए कि नुबुव्वत (पैगंबरी) और क़ुरआन को मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर अवतरित किया गया है। अतः मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का इनकार करने और इससे पहले तौरात में फेर-बदल करने के कारण, वे अल्लाह की ओर से दोहरे क्रोध के भागी बन गए। तथा मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की नुबुव्वत का इनकार करने वालों के लिए क़ियामत के दिन अपमानजनक यातना है।