तफ़सीर अल-मुख़्तसर
وَجَعَلْنَا ٱلسَّمَآءَ سَقْفًا مَّحْفُوظًا ۖ وَهُمْ عَنْ ءَايَـٰتِهَا مُعْرِضُونَ ﴿٣٢﴾
और हमने आकाश को एक खंभे के बिना गिरने से संरक्षित, तथा शैतानों के चोरी-छिपे सुनने से सुरक्षित छत बनाया। जबकि मुश्रिकों का हाल यह है कि वे आकाश में मौजूद निशानियों (जैसे सूर्य और चाँद) से मुँह फेरने वाले हैं, उनसे सीख नहीं लेते।