तफ़सीर अल-मुख़्तसर
وَإِذَا رَءَاكَ ٱلَّذِينَ كَفَرُوٓا۟ إِن يَتَّخِذُونَكَ إِلَّا هُزُوًا أَهَـٰذَا ٱلَّذِى يَذْكُرُ ءَالِهَتَكُمْ وَهُم بِذِكْرِ ٱلرَّحْمَـٰنِ هُمْ كَـٰفِرُونَ ﴿٣٦﴾
और (ऐ रसूल!) जब ये मुश्रिक लोग आपको देखते हैं, तो आपका मज़ाक़ उड़ाने लगते हैं और अपने अनुयायियों को यह कहकर आपसे नफ़रत दिलाते हैं कि : क्या यही वह व्यक्ति है, जो तुम्हारे देवताओं को, जिनकी तुम पूजा करते हो, बुरा-भला कहता है?! वे आपका मज़ाक उड़ाने के साथ-साथ उस क़ुरआन का भी इनकार करने वाले हैं, जो अल्लाह ने उनपर अवतरित किया है तथा उन नेमतों की नाशुक्री करते हैं, जो उसने उन्हें प्रदान की हैं। इसलिए वे खुद ही दोष के सबसे अधिक योग्य हैं क्योंकि उनके अंदर हर तरह की बुराई पाई जाती है।