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الأنبياءआयत 46

तफ़सीर अल-मुख़्तसर

وَلَئِن مَّسَّتْهُمْ نَفْحَةٌ مِّنْ عَذَابِ رَبِّكَ لَيَقُولُنَّ يَـٰوَيْلَنَآ إِنَّا كُنَّا ظَـٰلِمِينَ ﴿٤٦﴾

और यदि इन यातना के लिए जल्दी मचाने वाले लोगों को (ऐ रसूल!) आपके पालनहार की यातना का तनिक हिस्सा भी छू जाए, तो वे उस समय अवश्य कहेंगे : हाय हमारा विनाश और हमारा नुक़सान! निश्चय हम अल्लाह का साझी बनाकर और मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की लाई हुई शरीयत का इनकार करके अत्याचार करने वाले थे।