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الأنبياءआयत 65

तफ़सीर अल-मुख़्तसर

ثُمَّ نُكِسُوا۟ عَلَىٰ رُءُوسِهِمْ لَقَدْ عَلِمْتَ مَا هَـٰٓؤُلَآءِ يَنطِقُونَ ﴿٦٥﴾

फिर वे अपने हठ और इनकार पर लौट आए और बोले : (ऐ इबराहीम!) तुम अच्छी तरह जानते हो कि ये मूर्तियाँ बोलती नहीं हैं, तो तुम हमें उनसे पूछने का आदेश कैसे देते हो? यह बात उन्होंने अपने लिए एक तर्क के रूप में कही, लेकिन यह खुद उनके खिलाफ़ तर्क बन गई।