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الحجआयत 46

तफ़सीर अल-मुख़्तसर

أَفَلَمْ يَسِيرُوا۟ فِى ٱلْأَرْضِ فَتَكُونَ لَهُمْ قُلُوبٌ يَعْقِلُونَ بِهَآ أَوْ ءَاذَانٌ يَسْمَعُونَ بِهَا ۖ فَإِنَّهَا لَا تَعْمَى ٱلْأَبْصَـٰرُ وَلَـٰكِن تَعْمَى ٱلْقُلُوبُ ٱلَّتِى فِى ٱلصُّدُورِ ﴿٤٦﴾

क्या रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की लाई हुई शिक्षाओं का इनकार करने वाले ये लोग धरती में नहीं चले-फिरे, ताकि उन विनष्ट बस्तियों के निशान (खंडहर) देखें, और अपने मन से विचार करके शिक्षा ग्रहण करें, तथा उनकी कहानियों को मानने के उद्देश्य से सुनकर सीख लें, क्योंकि असल अंधापन आँख का अंधापन नहीं है, बल्कि विनाशकारी अंधापन अंतर्दृष्टि का अंधापन है, जिसके बाद इनसान न शिक्षा ग्रहण करता है और न सीख प्राप्त करता है।