तफ़सीर अल-मुख़्तसर
ذَٰلِكَ وَمَنْ عَاقَبَ بِمِثْلِ مَا عُوقِبَ بِهِۦ ثُمَّ بُغِىَ عَلَيْهِ لَيَنصُرَنَّهُ ٱللَّهُ ۗ إِنَّ ٱللَّهَ لَعَفُوٌّ غَفُورٌ ﴿٦٠﴾
यह जिसका उल्लेख किया गया है; अल्लाह के रास्ते में अपना घरबार छोड़ने वालों को जन्नत में दाखिल करना और अत्याचार करने वाले से उसके अत्याचार का उसी के समान बदला लेने की अनुमति ताकि उसके लिए उस पर कोई पाप न हो। फिर यदि अत्याचारी दोबारा अत्याचार करे, तो अल्लाह उसकी अवश्य मदद करेगा जिसपर अत्याचार किया गया है। निःसंदेह अल्लाह ईमान वालों के गुनाहों को माफ़ करने वाला, उन्हें क्षमा करने वाला है।