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المؤمنونआयत 101

तफ़सीर अल-मुख़्तसर

فَإِذَا نُفِخَ فِى ٱلصُّورِ فَلَآ أَنسَابَ بَيْنَهُمْ يَوْمَئِذٍ وَلَا يَتَسَآءَلُونَ ﴿١٠١﴾

फिर जब सूर (नरसिंघा) में फूँक मारने के कार्य पर नियुक्त फरिश्ता, उसमें दूसरी बार फूँक मारेगा, जो क़ियामत का ऐलान होगा, तो उनके बीच कोई रिश्ते-नाते नहीं होंगे जिनपर वे गर्व करते हैं, क्योंकि वे क़ियामत की भयावहता में व्यस्त होंगे। तथा वे अपनी-अपनी चिंताओं में व्यस्त होने के कारण एक-दूसरे को नहीं पूछेंगे।