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المؤمنونआयत 30

तफ़सीर अल-मुख़्तसर

إِنَّ فِى ذَٰلِكَ لَـَٔايَـٰتٍ وَإِن كُنَّا لَمُبْتَلِينَ ﴿٣٠﴾

नूह़ (अलैहिस्सलाम) और उनके मोमिन साथियों को बचाने और काफ़िरों को विनष्ट करने में इस बात के स्पष्ट प्रमाण हैं कि हम अपने रसूलों की मदद करने और उन्हें झुठलाने वालों को नष्ट करने की शक्ति रखते हैं। निश्चय हम नूह अलैहिस्सलाम की जाति की ओर नूह़ अलैहिल्लाम को भेजकर उनका परीक्षण करने वाले थे, ताकि काफ़िर से मोमिन और अवज्ञाकारी से आज्ञाकारी स्पष्ट हो जाए।