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النورआयत 6

तफ़सीर अल-मुख़्तसर

وَٱلَّذِينَ يَرْمُونَ أَزْوَٰجَهُمْ وَلَمْ يَكُن لَّهُمْ شُهَدَآءُ إِلَّآ أَنفُسُهُمْ فَشَهَـٰدَةُ أَحَدِهِمْ أَرْبَعُ شَهَـٰدَٰتٍۭ بِٱللَّهِ ۙ إِنَّهُۥ لَمِنَ ٱلصَّـٰدِقِينَ ﴿٦﴾

वे पुरुष जो अपनी पत्नियों पर व्यभिचार का आरोप लगाएँ और उनके पास खुद के अलावा कोई गवाह न हों, जो उनके आरोप के सत्य होने की गवाही दें; तो उनमें से एक व्यक्ति अल्लाह की क़सम के साथ चार बार गवाही दे कि : निःसंदेह वह अपनी पत्नी पर व्यभिचार का आरोप लगाने में निश्चय सच्चा है।