तफ़सीर अल-मुख़्तसर
قُلْ أَذَٰلِكَ خَيْرٌ أَمْ جَنَّةُ ٱلْخُلْدِ ٱلَّتِى وُعِدَ ٱلْمُتَّقُونَ ۚ كَانَتْ لَهُمْ جَزَآءً وَمَصِيرًا ﴿١٥﴾
(ऐ रसूल!) उनसे कह दें : क्या यह उक्त यातना, जिसका तुम्हारे सामने वर्णन किया गया है, बेहतर है या अमरता की जन्नत, जिसकी नेमतें सदा उपलब्ध रहेंगी और कभी भी ख़त्म नहीं होंगी? तथा यही वह जन्नत है, जिसका अल्लाह ने अपने मोमिन बंदों से वादा किया है कि वह उनके लिए प्रतिफल और ठिकाना होगी, जहाँ वे क़ियामत के दिन लौटकर जाएँगे।