तफ़सीर अल-मुख़्तसर
وَقَالَ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ لَوْلَا نُزِّلَ عَلَيْهِ ٱلْقُرْءَانُ جُمْلَةً وَٰحِدَةً ۚ كَذَٰلِكَ لِنُثَبِّتَ بِهِۦ فُؤَادَكَ ۖ وَرَتَّلْنَـٰهُ تَرْتِيلًا ﴿٣٢﴾
और अल्लाह का इनकार करने वालों ने कहा : यह क़ुरआन रसूल पर एक ही बार में क्यों नहीं उतार दिया गया? इस तरह थोड़ा-थोड़ा करके क्यों उतारा गया? (अल्लाह कहता है :) हमने क़ुरआन को ऐसे ही थोड़ा-थोड़ा करके इसलिए उतारा, ताकि (ऐ रसूल!) हम समय-समय पर इसे उतारकर आपके दिल को दृढ़ता प्रदान करें। तथा हमने इसे थोड़ा-थोड़ा इसलिए भी उतारा, ताकि इसे समझना और याद करना आसान हो जाए।