तफ़सीर अल-मुख़्तसर
وَمَن تَابَ وَعَمِلَ صَـٰلِحًا فَإِنَّهُۥ يَتُوبُ إِلَى ٱللَّهِ مَتَابًا ﴿٧١﴾
और जो अल्लाह के सामने तौबा करता है और आज्ञाकारिता के कार्य करके तथा अवज्ञा को त्यागकर अपनी सच्ची तौबा को साबित करता है, तो निश्चय उसकी तौबा स्वीकार की जाती है।