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الشعراءआयत 125

तफ़सीर अल-मुख़्तसर

إِنِّى لَكُمْ رَسُولٌ أَمِينٌ ﴿١٢٥﴾

निःसंदेह मैं तुम्हारा रसूल हूँ, अल्लाह ने मुझे तुम्हारी ओर भेजा है। (मैं) अमानतदार हूँ, जो कुछ अल्लाह ने मुझे पहुँचाने का आदेश दिया है, उसमें कोई कमी-बेशी नहीं करता।