तफ़सीर अल-मुख़्तसर
فَقَرَأَهُۥ عَلَيْهِم مَّا كَانُوا۟ بِهِۦ مُؤْمِنِينَ ﴿١٩٩﴾
फिर वह इसे उनके सामने पढ़ता, तो भी ये लोग उसपर ईमान लाने वाले न होते; क्योंकि वे कहते : हम इसे नहीं समझते हैं। इसलिए उन्हें अल्लाह का शुक्र अदा करना चाहिए की यह (क़ुरआन) उनकी भाषा (अरबी) में उतरा है।