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الشعراءआयत 216

तफ़सीर अल-मुख़्तसर

فَإِنْ عَصَوْكَ فَقُلْ إِنِّى بَرِىٓءٌ مِّمَّا تَعْمَلُونَ ﴿٢١٦﴾

फिर यदि वे आपकी अवज्ञा करें और उसको न मानें जो आपने उन्हें अल्लाह को एकमात्र पूज्य मानने और उसकी आज्ञा का पालन करने का आदेश दिया है, तो आप उनसे कह दें : तुम जो शिर्क और पाप करते हो, मैं उससे बिलकुल अलग-थलग हूँ।