तफ़सीर अल-मुख़्तसर
إِن نَّشَأْ نُنَزِّلْ عَلَيْهِم مِّنَ ٱلسَّمَآءِ ءَايَةً فَظَلَّتْ أَعْنَـٰقُهُمْ لَهَا خَـٰضِعِينَ ﴿٤﴾
यदि हम उनपर आकाश से कोई निशानी उतारना चाहें, तो उसे उनपर उतार दें, फिर उनकी गर्दनें उसके आगे झुकी रह जाएँ। किंतु हमने उनकी परीक्षा लेने के उद्देश्य से ऐसा नहीं चाहा कि : क्या वे ग़ैब (परोक्ष) पर ईमान लाते हैं?