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النملआयत 35

तफ़सीर अल-मुख़्तसर

وَإِنِّى مُرْسِلَةٌ إِلَيْهِم بِهَدِيَّةٍ فَنَاظِرَةٌۢ بِمَ يَرْجِعُ ٱلْمُرْسَلُونَ ﴿٣٥﴾

मैं यह पत्र भेजने वाले तथा उसके लोगों के पास एक उपहार भेजने वाली हूँ और देखती हूँ कि दूत इस उपहार को भेजने के बाद क्या उत्तर लाते हैं।