तफ़सीर अल-मुख़्तसर
بَلِ ٱدَّٰرَكَ عِلْمُهُمْ فِى ٱلْـَٔاخِرَةِ ۚ بَلْ هُمْ فِى شَكٍّ مِّنْهَا ۖ بَلْ هُم مِّنْهَا عَمُونَ ﴿٦٦﴾
अथवा क्या निरंतर उन्हें आख़िरत के बारे में ज्ञान होता रहा, तो वे इसके बारे में निश्चित हैं? नहीं! बल्कि वे आख़िरत के बारे में संदेह और विस्मय के शिकार हैं। बल्कि, उनकी अंतर्दृष्टि उससे अंधी हो गई है।