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القصصआयत 30

तफ़सीर अल-मुख़्तसर

فَلَمَّآ أَتَىٰهَا نُودِىَ مِن شَـٰطِئِ ٱلْوَادِ ٱلْأَيْمَنِ فِى ٱلْبُقْعَةِ ٱلْمُبَـٰرَكَةِ مِنَ ٱلشَّجَرَةِ أَن يَـٰمُوسَىٰٓ إِنِّىٓ أَنَا ٱللَّهُ رَبُّ ٱلْعَـٰلَمِينَ ﴿٣٠﴾

फिर जब मूसा अलैहिस्सलाम उस आग के पास पहुँचे, जो उन्हें दिखाई दी थी, तो उनके महिमावान एवं सर्वशक्तिमान रब ने घाटी की दाहिनी ओर से, उस स्थान में जिसे अल्लाह ने मूसा से बात करके बरकत वाला बनाया था, एक पेड़ से पुकार कर कहा : ऐ मूसा! निःसंदेह मैं ही अल्लाह हूँ, जो सारी सृष्टियाों का पालनहार है।