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القصصआयत 50

तफ़सीर अल-मुख़्तसर

فَإِن لَّمْ يَسْتَجِيبُوا۟ لَكَ فَٱعْلَمْ أَنَّمَا يَتَّبِعُونَ أَهْوَآءَهُمْ ۚ وَمَنْ أَضَلُّ مِمَّنِ ٱتَّبَعَ هَوَىٰهُ بِغَيْرِ هُدًى مِّنَ ٱللَّهِ ۚ إِنَّ ٱللَّهَ لَا يَهْدِى ٱلْقَوْمَ ٱلظَّـٰلِمِينَ ﴿٥٠﴾

फिर यदि क़ुरैश तौरात एवं क़ुरआन से अधिक मार्गदर्शन करने वाली कोई किताब लाने के मुतालबे को स्वीकार न करें, तो आप निश्चित रूप से जान लें कि उनका इन दोनों को झुठलाना सबूत पर आधारित नहीं है, बल्कि इच्छा का पालन करने के कारण है। और उससे अधिक पथभ्रष्ट कोई नहीं है जो सर्वशक्तिमान अल्लाह के मार्गदर्शन के बिना अपनी इच्छा का अनुसरण करे। निःसंदेह अल्लाह उन लोगों को मार्गदर्शन का सामर्थ्य नहीं देता, जो अल्लाह का इनकार करके अपने आपपर अत्याचार करने वाले हैं।