तफ़सीर अल-मुख़्तसर
فَمَا كَانَ جَوَابَ قَوْمِهِۦٓ إِلَّآ أَن قَالُوا۟ ٱقْتُلُوهُ أَوْ حَرِّقُوهُ فَأَنجَىٰهُ ٱللَّهُ مِنَ ٱلنَّارِ ۚ إِنَّ فِى ذَٰلِكَ لَـَٔايَـٰتٍ لِّقَوْمٍ يُؤْمِنُونَ ﴿٢٤﴾
जब इबराहीम अलैहिस्सलाम ने अपनी जाति को केवल अल्लाह की इबादत करने तथा उसके अलावा मूर्तियों की पूजा छोड़ने का आदेश दिया, तो उनका उत्तर इसके सिवा कुछ न था कि उन्होंने कहा : अपने पूज्यों का समर्थन करने के लिए उसे मार डालो या उसे आग में फेंक दो। तो अल्लाह ने उन्हें आग से बचा लिया। निःसंदेह उनके आग में फेंके जाने के पश्चात उन्हें उससे बचा लेने में ईमान वालों के लिए बहुत-से उपदेश है, क्योंकि यही लोग हैं, जो उपदेशों से लाभ उठाते हैं।