तफ़सीर अल-मुख़्तसर
إِنَّ ٱلَّذِينَ تَوَلَّوْا۟ مِنكُمْ يَوْمَ ٱلْتَقَى ٱلْجَمْعَانِ إِنَّمَا ٱسْتَزَلَّهُمُ ٱلشَّيْطَـٰنُ بِبَعْضِ مَا كَسَبُوا۟ ۖ وَلَقَدْ عَفَا ٱللَّهُ عَنْهُمْ ۗ إِنَّ ٱللَّهَ غَفُورٌ حَلِيمٌ ﴿١٥٥﴾
(ऐ मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के साथियो!) जिस दिन उहुद के मैदान में, मुश्रिकों के एक गिरोह की भिड़ंत मुसलमानों के एक समूह से हुई, उस दिन जो लोग पराजित हुए, उन्हें शैतान ने उनके कुछ अपने ही किए हुए पापों के कारण, ग़लती करने पर उभारा। और अल्लाह ने अपनी ओर से कृपा एवं दया करते हुए उन्हें क्षमा कर दिया और उनकी पकड़ नहीं की। वास्तव में अल्लाह तौबा करने वालों को क्षमा करने वाला और सहनशील है जो जल्दी सज़ा नहीं देता।