तफ़सीर अल-मुख़्तसर
إِذْ قَالَتِ ٱمْرَأَتُ عِمْرَٰنَ رَبِّ إِنِّى نَذَرْتُ لَكَ مَا فِى بَطْنِى مُحَرَّرًا فَتَقَبَّلْ مِنِّىٓ ۖ إِنَّكَ أَنتَ ٱلسَّمِيعُ ٱلْعَلِيمُ ﴿٣٥﴾
(ऐ रसूल!) उस समय को याद करें, जब मरयम अलैहस्सलाम की माँ इमरान की पत्नी ने कहा : ऐ मेरे पालनहार! मैंने अपने लिए यह अनिवार्य कर लिया है कि मेरे पेट में जो गर्भ है, उसे विशुद्ध रूप से तेरे लिए विशिष्ट कर दूँ, जो तेरी और तेरे घर की सेवा करने के लिए हर चीज़ से आज़ाद किया हुआ हो। इसलिए उसे मुझसे स्वीकार कर ले। नि:संदेह तू ही मेरी दुआ सुनने वाला और मेरा इरादा जानने वाला है।