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آل عمرانआयत 52

तफ़सीर अल-मुख़्तसर

فَلَمَّآ أَحَسَّ عِيسَىٰ مِنْهُمُ ٱلْكُفْرَ قَالَ مَنْ أَنصَارِىٓ إِلَى ٱللَّهِ ۖ قَالَ ٱلْحَوَارِيُّونَ نَحْنُ أَنصَارُ ٱللَّهِ ءَامَنَّا بِٱللَّهِ وَٱشْهَدْ بِأَنَّا مُسْلِمُونَ ﴿٥٢﴾

जब ईसा अलैहिस्सलाम को उनके कुफ़्र पर आग्रह का आभास हुआ, तो उन्होंने बनी इसराईल को संबोधित करते हुए कहा : अल्लाह की ओर बुलाने में मेरी सहायता कौन करेगा? उनके अनुयायियों में से चुनिंदा लोगों ने कहा : हम अल्लाह के धर्म के समर्थक हैं। हम अल्लाह पर ईमान लाए और हमने आपका अनुसरण किया। और - ऐ ईसा! - आप गवाह रहें कि हम अल्लाह को एकमात्र पूज्य मानते हुए और उसकी आज्ञाकारिता के साथ उसके अधीन हैं।