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الرومआयत 57

तफ़सीर अल-मुख़्तसर

فَيَوْمَئِذٍ لَّا يَنفَعُ ٱلَّذِينَ ظَلَمُوا۟ مَعْذِرَتُهُمْ وَلَا هُمْ يُسْتَعْتَبُونَ ﴿٥٧﴾

जिस दिन अल्लाह प्राणियों को हिसाब और बदला देने के लिए उठाएगा, उस दिन ज़ालिमों को उनके बनाए गए बहानों से लाभ नहीं होगा और न ही उनसे तौबा और अल्लाह की ओर एकाग्रता के द्वारा अल्लाह को प्रसन्न करने के लिए कहा जाएगा। क्योंकि इसका समय बीत चुका होगा।