तफ़सीर अल-मुख़्तसर
يَـٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوٓا۟ إِذَا نَكَحْتُمُ ٱلْمُؤْمِنَـٰتِ ثُمَّ طَلَّقْتُمُوهُنَّ مِن قَبْلِ أَن تَمَسُّوهُنَّ فَمَا لَكُمْ عَلَيْهِنَّ مِنْ عِدَّةٍ تَعْتَدُّونَهَا ۖ فَمَتِّعُوهُنَّ وَسَرِّحُوهُنَّ سَرَاحًا جَمِيلًا ﴿٤٩﴾
ऐ अल्लाह पर ईमान रखने और उसकी शरीयत पर अमल करने वालो! जब ईमान वाली महिलाओं से विवाह करो, फिर उनके साथ सहवास करने से पूर्व ही उन्हें तलाक़ दे दो, तो ऐसे में तुम्हारे लिए उनपर 'इद्दत' नहीं है, चाहे वह मासिक धर्म के द्वारा हो या महीनों के द्वारा। क्योंकि उनके साथ सहवास न होने के कारण यह ज्ञात है कि उनका गर्भ खाली है। तथा तलाक़ के कारण उनके टूटे हुए दिलों की सांत्वना के लिए, अपनी क्षमता के अनुसार उन्हें कुछ धन दे दो। और उन्हें कष्ट पहुँचाए बिना, भलाई के साथ उनका रास्ता छोड़ दो।