तफ़सीर अल-मुख़्तसर
وَجَعَلْنَا بَيْنَهُمْ وَبَيْنَ ٱلْقُرَى ٱلَّتِى بَـٰرَكْنَا فِيهَا قُرًى ظَـٰهِرَةً وَقَدَّرْنَا فِيهَا ٱلسَّيْرَ ۖ سِيرُوا۟ فِيهَا لَيَالِىَ وَأَيَّامًا ءَامِنِينَ ﴿١٨﴾
और हमने यमन में सबा वालों के बीच और शाम की उन बस्तियों के बीच, जिनमें हमने बरकत रखी थी, पास-पास कुछ और बस्तियाँ बना दी थीं। और हमने उनमें यात्रा के पड़ाव इस प्रकार निर्धारित किए थे कि वे एक बस्ती से दूसरी बस्ती तक बिना किसी कष्ट के यात्रा करते थे यहाँ तक कि वे शाम पहुँच जाते थे। और हमने उनसे कहा था : तुम दुश्मन, भूख और प्यास से सुरक्षित होकर, रात या दिन में जितना चाहो चलो।